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Showing posts from March, 2023

DUKHI MAN

बहुत समझाया उसे पर मन उसका चंचल है नहीं समझ उसे अभी जा रहा वो गलत राह है बस में नही वो खुद के  किसी की सुनता भी नही है  इसी चिंता से आज दु:खी हुआ बेचारा मेरा मन है।

BAIRAN NAYAN

 ना जाने क्या हो गया बादल का रुख बदल गया बारिश आंखों से हो गई चांद प्रेम का ओझल हो गया। उगता सूरज कही खो गया किरणों का दम घुट गया अँधियारो में नयन बैरन हुई मेरा दिल टूट बिखर गया।

PYAR PAR KAFAN

 नींद से दोस्ती टूट गई  तारों से नाता जुड़ गया रात अंधेरों में गुम हो गई  सुनसान सड़क आजाद हो गई, बतियाँ सारी दफन हो गई पत्र प्रेम का खूनी हो गया खुशियां कोसो दूर चली गई कहानी ही प्यार की कफ़न हो गई।

BESAHARA

पल पल बढ़ती दूरियां राह अनजान लगने लगी जब साथ उसका छूटा  दुनिया सुनसान लगने लगी बेसहारा बना दिल मेरा आवारा मैं भटकने लगी नाम से कोसो दूर  बदनामी के गले लगी जो कुछ था मेरा सब लुटा बैठ रोने लगी लेने वाला  यूँ हंस आगे चला मैं बस उसे देख खुद को कोसने लगी। स्वरचित

SUCCHI CHAHAT

 चाहत वो है  जो हजारों बार होती है ,  और नई चाहत की उम्मीद लगाए  आगे बढ़ती जाती है   और पिछला भुला दी जाती है  सच्ची चाहत वो नही  जो भूला दी जाए   ये तो वो है  जिसे एक दुल्हन सी सजा  हमेशा अपने मन रूपी मंडप में बैठा  जीवन का एक हिस्सा बना  ज़िन्दगी निर्वाह की जाती है   परवाह नही  कि  जो तुम्हारी सच्ची चाहत हो   वो तुम्हे भी उतना ही चाहे   जितना कि तुम   पर हाँ  तुम्हारी उसके प्रति वफादारी   एकाग्रता की तरंग   जरूर उसे तुम्हारी तरफ खिंच लाएगी ।

BITA JAMANA

 जमाना बित गया  तुमसे मिले, और तुम कहते हो  कल ही तो मिले थे,  ना चाहो मिलना  तो कोई अंकुश नही,  पर हाँ  इस कदर रोज रोज के,  ना मिलने के बहाने बनाना तुम्हे शोभा नही देता, क्या तुम भूल गए वो दिन जब मुझसे मिलने के लिए छोटे बड़े सारे बहाने बनाते थे, और मैं बिना मना किये  बिना कुछ पूछे,  कुछ ना कहते हुए , तुम्हारे पास एक पल में दौड़ी चली आती थी, उस पल को  तकती मेरी आँखें  अब पथरा सी गई है  और तुम लगातार कहे जा रहे हो  कल ही तो मिले थे कल ही तो मिले थे। स्वरचित

SIRF TERI

 सुनाती हूँ मै,  तूम्हे एक कहानी, एक दिन हुई थी,  मैं प्रेम दीवानी,  कहने को तेरे,   मैं बनी थी रानी,   पर तूने मुझे,   सदा समझा बेगानी,  सुन..   चाहत की लड़ी,   अब मुझे,   कही और ना लगानी,  सिर्फ तेरी हूँ,  तेरी ही बनकर,  ज़िन्दगी बितानी । स्वरचित

Dil ki pukar

प्यार के नौका पर होके सवार करती रिश्तों के सागर को पार सांझ ढ़लते ही याद आता है यार मिले मनमीत  मुझे बस उसका इंतजार ये चाहत मेरी  और दिल की है पुकार तुम आओ पास  मेरे सरकार। स्वरचित  सीमा मूथा "जोशी" जोधपुर राजस्थान

Chhod na jao

 तुम जा रहे हो  क्यो  मुझसे बिना मिले ही  नही चाहते ना मेरी शक्ल देखना क्या गलती हुई मुझसे बस यही ना दिल मे जगह  तुम्हारे अलावा किसी को नही दी  बरसो बरस से तुमको ही  सिंहासन पर बैठाया रखा मत जाओ छोड़ मुझे  एक बार फिर कह रही  रुक जाओ ना यहां राज तुम्हारा है  और तुम्हारा ही रहेगा एक बार तो मुझसे मिलने आओ  ना आओ तो  दूर से ही  बस अपनी नज़रे  मुझ पर डाल दो मैं जानती हूं  और विश्वास भी है  कि तुम रुक जाओगे  मुझे अकेला छोड़ नही जाओगे।