BESAHARA
पल पल बढ़ती दूरियां
राह अनजान लगने लगी
जब साथ उसका छूटा
दुनिया सुनसान लगने लगी
बेसहारा बना दिल मेरा
आवारा मैं भटकने लगी
नाम से कोसो दूर
बदनामी के गले लगी
जो कुछ था मेरा
सब लुटा बैठ रोने लगी
लेने वाला
यूँ हंस आगे चला
मैं बस उसे देख
खुद को कोसने लगी।
स्वरचित
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