BITA JAMANA

 जमाना बित गया 

तुमसे मिले,

और तुम कहते हो 

कल ही तो मिले थे, 

ना चाहो मिलना 

तो कोई अंकुश नही, 

पर हाँ 

इस कदर रोज रोज के, 

ना मिलने के बहाने बनाना

तुम्हे शोभा नही देता,

क्या तुम भूल गए वो दिन

जब मुझसे मिलने के लिए

छोटे बड़े सारे बहाने बनाते थे,

और मैं बिना मना किये 

बिना कुछ पूछे, 

कुछ ना कहते हुए ,

तुम्हारे पास एक पल में

दौड़ी चली आती थी,

उस पल को 

तकती मेरी आँखें 

अब पथरा सी गई है 

और तुम लगातार कहे जा रहे हो 

कल ही तो मिले थे

कल ही तो मिले थे।


स्वरचित

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