SIRF TERI

 सुनाती हूँ मै, 

तूम्हे एक कहानी,

एक दिन हुई थी, 

मैं प्रेम दीवानी, 

कहने को तेरे,  

मैं बनी थी रानी,  

पर तूने मुझे,  

सदा समझा बेगानी, 

सुन..  

चाहत की लड़ी,  

अब मुझे,  

कही और ना लगानी, 

सिर्फ तेरी हूँ, 

तेरी ही बनकर, 

ज़िन्दगी बितानी ।


स्वरचित

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