SUCCHI CHAHAT

 चाहत वो है 

जो हजारों बार होती है , 

और नई चाहत की उम्मीद लगाए 

आगे बढ़ती जाती है  

और पिछला भुला दी जाती है 

सच्ची चाहत वो नही 

जो भूला दी जाए  

ये तो वो है 

जिसे एक दुल्हन सी सजा 

हमेशा अपने मन रूपी मंडप में बैठा 

जीवन का एक हिस्सा बना 

ज़िन्दगी निर्वाह की जाती है  

परवाह नही 

कि 

जो तुम्हारी सच्ची चाहत हो  

वो तुम्हे भी उतना ही चाहे  

जितना कि तुम  

पर हाँ 

तुम्हारी उसके प्रति वफादारी  

एकाग्रता की तरंग  

जरूर उसे तुम्हारी तरफ खिंच लाएगी ।

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