चाहत वो है जो हजारों बार होती है , और नई चाहत की उम्मीद लगाए आगे बढ़ती जाती है और पिछला भुला दी जाती है सच्ची चाहत वो नही जो भूला दी जाए ये तो वो है जिसे एक दुल्हन सी सजा हमेशा अपने मन रूपी मंडप में बैठा जीवन का एक हिस्सा बना ज़िन्दगी निर्वाह की जाती है परवाह नही कि जो तुम्हारी सच्ची चाहत हो वो तुम्हे भी उतना ही चाहे जितना कि तुम पर हाँ तुम्हारी उसके प्रति वफादारी एकाग्रता की तरंग जरूर उसे तुम्हारी तरफ खिंच लाएगी ।
सुनाती हूँ मै, तूम्हे एक कहानी, एक दिन हुई थी, मैं प्रेम दीवानी, कहने को तेरे, मैं बनी थी रानी, पर तूने मुझे, सदा समझा बेगानी, सुन.. चाहत की लड़ी, अब मुझे, कही और ना लगानी, सिर्फ तेरी हूँ, तेरी ही बनकर, ज़िन्दगी बितानी । स्वरचित
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